देवघर रोपवे हादसा: रोपवे रेस्क्यू चलाने वालों से पीएम मोदी ने की बातचीत, जानें क्या कहा..

झारखंड के देवघर त्रिकुट पर्वत रोप-वे हादसे में लोगों की जान बचाकर चर्चा में आए पन्ना लाल से बुधवार की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की। पन्ना लाल से पूछा कि ऐसे काम के लिए तो बड़े प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। आपने यह काम कैसे किया। क्या इसके लिए कोई प्रशिक्षण लिया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने पन्ना लाल से पूछा कि आप क्या काम करते हैं। पन्ना लाल ने बताया कि किस तरह उन्होंने ट्रॉली में फंसे लोगों को खाना-पानी पहुंचा। कार्यक्रम में मौजूद सांसद डा. निशिकांत दुबे ने प्रधानमंत्री का परिचय पन्ना लाल से कराया। कार्यक्रम में लोगों की जान बचाने वाले कई और लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, वायु सेना, सेना, एनडीआरएफ के अधिकारी, झारखंड पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।

पन्ना लाल से बात करने से पलले प्रधानमंत्री ने एनडीआरएफ और वायु सेवा के जवानों से बात की।ऑपरेशन की कठिनाईयों के बारे में जानकारी ली। पूछा कि आप लोगों ने रोते-बिलखते लोगों को किस प्रकार हाैसला दिलाया। वायु सेवा व एनडीआरएफ के जवानों ने ऑपरेशन में आने वाले मुश्किलों के बारे में बताया। घटना के दिन रात में बारह ट्रॉली में से छह ट्रॉली में लोगों को खाना पहुंचाया गया। तार के कारण वायु सेना के समक्ष आई परेशानियों का जिक्र किया।

इससे पहले शाम झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। देवघर उपायुक्त कार्यालय में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) में CM हेमंत सोरेन ने पन्ना पाल को सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी। उपायुक्त ने पन्ना लाल के बारे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जानकारी दी। बताया कि यह रोप-वे पर वर्ष 2009 से काम कर रहे हैं। संकट के समय अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर पन्ना लाल ने महिलाओं, बच्चों और पुरुषों की जान बचाई।

देवघर के पन्नालाल को जानिए, जिन्होंने बचाई 11 लोगों की जान..
बसडीहा गांव निवासी पन्नालाल सिंह पेशे से त्रिकुट पहाड़ पर गाइड का काम करते हैं। वह त्रिकुट पहाड़ के पास के ही रहने वाले हैं। दुर्घटना के बाद उन्होंने रस्सी और कुर्सी के सहारे रोप-वे में फंसे 10 से 11 लोगों को ट्रॉली से नीचे उतारा था। एक ओर जहां वायुसेना, आइटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान लगे थे। वहीं, दूसरी ओर कुछ स्‍थानीय लोग भी उनकी सहायता में पूरे मनोयोग से जुटे थे। इन्हें न तो कोई सरकारी आदेश मिला था और न ही इस रोप-वे पर कोई अपना फंसा था। फिर भी फंसे लोगों को बचाने के लिए उन्होंने न दिन की परवाह की और न रात की चिंता। बताया जाता है कि रविवार रात के अंधेरे में रोप-वे के तार से लटकते हुए वे करीब सौ फीट की दूरी तय कर 18 नंबर केबिन तक पहुंचे। उसके बाद वहां फंसे लोगों तक पानी और खाना पहुंचाया। पूरी रात वह ओपन ट्राली से ऊपर-नीचे करते रहे। ट्राली में फंसे लोगों का वह हौसला बढ़ाते रहे।

कमर में रस्सा बांध 40 फीट की ऊंचाई पर..
जिसने भी उन्‍हें अपनी जान हथेली पर रखकर दूसरों की जान बचाते देखा, उसने यही कहा कि दुबले-पतले कद-काठी के पन्नालाल का जिगर लोहे का है। उन्‍होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपनी कमर में रस्सा बांधा और करीब 40 फीट की उंचाई पर केबिन संख्या आठ में फंसे चार लोगों तक पहुंच गए। उसके बाद उन्‍होंने काफी कुशलता से सभी चार लोगों को बारी-बारी से कुर्सी के सहारे नीचे उतार दिया। इस दौरान लोगों ने ताली बजाकर उनकी हौसला अफजाई की। लोगों ने सेना और वायु सेना के जवानों के कार्यों को भी काफी सराहा। उनके लिए भी लोगों ने काफी ताली बजाई। इसके साथ ही वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे से पहाड़ के ऊपर का हिस्सा गुंजायमान हो गया। लोगों ने राहत कार्य में जुड़े लोगों की मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाया।

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