झारखंड में अब बच्चे करेंगे सड़क सुरक्षा विषय की पढ़ाई..

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों पर मंथन के दौरान सड़क हादसे को लेकर काफी गंभीर दिखे | उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में 18 से 35 वर्ष के बीच के युवा जान गंवा रहे हैं जो बेहद चिंतनीय है | हमें इस पर ध्यान केंद्रित करना है और इसका समाधान ढूंढ़ना है | इसके लिए सड़क हादसों को रोकना जरूरी है साथ ही गति सीमा पर विशेष लगाम लगाना आवश्यक है | मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसे को रोकने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है | उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा विषय को छठी, सातवीं और आठवीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने पर सरकार विचार कर रही है | साथ ही, मध्य विद्यालयों, उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उच्च विद्यालयों में एक सड़क सुरक्षा नोडल शिक्षक की प्रतिनियुक्ति करने की भी योजना है |

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद पहुंचाने के लिए नेक नागरिक से संबंधित नीति काफी कारगर होगी | आपको बता दें कि नेक नागरिकों को सड़क हादसे से ग्रसित व्यक्ति को हॉस्पिटल पहुंचाने पर सरकार की तरफ से उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाएगी | इसे लागू कराने से संबंधित नियमावली को कैबिनेट से स्वीकृति मिल गयी है | ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में हो रही सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति की सहायता के लिए नेक नागरिकों के वॉलेंटियर्स टीम का गठन किया जाना है | नेक नागरिकों के स्वयं सहायता समूह को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करायी जायेगी |

जानकारी के अनुसार , राज्य सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में सड़क दुर्घटना में प्रतिदिन औसतन 10 लोग अपनी जान गंवाते हैं | वहीं ,जान गंवानेवालों में से 10 प्रतिशत पैदल चलनेवाले और 7 प्रतिशत साइकिल सवार हैं | आकड़ो के अनुसार, वर्ष 2020 की स्थिति पर गौर करें तो कुल 4377 सड़क दुर्घटनाएं हुईं | जिनमें 3303 लोग घायल हुए और 3044 लोगों ने अपनी जान गंवायी है | चौंकाने वाली बात है कि 92 प्रतिशत दुर्घटनाएं सिर्फ ओवर स्पीड की वजह से हुई थ | जबकि दो प्रतिशत दुर्घटनाएं नशे में, गलत दिशा में वाहन चलाने से चार प्रतिशत, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने और लाल बत्ती पर क्रॉस करने से एक प्रतिशत लोग हादसे के शिकार हुए थे | सबसे ज़्यादा सड़क दुर्घटना का मामला वर्ष 2020 में खूंटी , रांची और गुमला से आया था | जबकि गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे कम सड़क दुर्घटनाएं हुई |

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि लोगों को सड़क दुर्घटना से बचाने एवं जागरूकता के लिए 16913 साइन बोर्ड, 4271 गति सीमा एवं 75996 सूचनाओं से संबंधित साइनऐज लगाया जा चुका है | साथ ही ,एनएच, राज्य पथ और जिलों की सड़कों से मिलने वाले जंक्शन पर 188 पीला ब्लिंकर स्टैंड लगाये जा चुके हैं | वहीं ,260 जगहों पर पीला ब्लिंकर स्टैंड लगाने की प्रक्रिया जारी है | उन्होंने कहा कि सभी जिलों में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर सरकार विचार कर रही है | वर्तमान में रिम्स रांची में लेवल-1 का, हजारीबाग गढ़वा का नगर उंटारी, पूर्वी सिंहभूम स्थित बहरागोड़ा और एसडीएच बरही में लेवल तीन का ट्रॉमा सेंटर कार्य कर रहा है | जबकि लेबल तीन के ट्रॉमा सेंटर कोडरमा, लोहरदगा स्थित कुडू, एसडीएच घाटशिला में निर्माणाधीन हैं |

मुख्यमंत्री ने बताया कि यातायात के दबाववाले जिलों में सरकार विशेष ध्यान दे रही है | साथ ही , रांची, जमशेदपुर, सरायकेला, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो और देवघर में 88 हाईवे पेट्रोल्स और 168 पीसीआर वैन की तैनाती की गयी है | ताकि किसी तरह का हादसा होने पर एम्फोर्समेंट टीम मदद के लिए तैयार रहे |

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