लगभग 10 वर्षों के बाद राज्य में बिजली शुल्क में किया जायेगा बदलाव..

राज्य में 2011 के बाद एक बार फिर से बिजली दर बढ़ाने की कवायद चल रही है। जल्द इस विषय में वणिज्यकर विभाग राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव पेश करेगी।  इस प्रस्ताव में बिजली शुल्क को तीन स्लैब में 4-7 प्रतिशत बढ़ाने की संभावना है।जिस पर वाणिज्यकर मंत्री रामेश्वर उरांव ने अपनी मंजूरी दे दी है। जैसे ही कैबिनेट से प्रस्ताव पर सहमति मिलेगी राज्य में इस नए बिजली शुल्क को लागू कर दिया जायेगा।

उम्मीद जताई जा रही है कि इस नए बिजली शुल्क के बाद सभी औद्योगिक व घरेलू इकाईओं को मिलाकर राज्य के खजाने में लगभग वार्षिक एक हज़ार करोड़ रुपए आएंगे। इस प्रस्ताव पर विभाग सहित इससे जुड़े विभागों ने अपनी स्वीकृति दे दी है। अन्य राज्यों की तुलना में उद्योगों को औसत शुल्क ही देना होगा। जबकि घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव थोड़ा ज्यादा पड़ेगा। ये बिजली शुल्क उपभोक्ताओं को प्राप्त बिजली बिल के साथ जमा करना होगा। ये शुल्क पहले बिजली विभाग के खाते में जाएगा और जिसके बाद राज्य खजाने में पहुंचेगा।

राज्य में बिजली शुल्क को अन्य राज्यों की तुलना में कम पाया गया। जिसके बाद इसकी वृद्धि की अनुसंशा राज्य के प्रधान महालेखाकार की तरफ से की गयी थी। उन्होंने पड़ोसी राज्य के बिजली शुल्क के आस पास राज्य का बिजली शुल्क रखने की बात कही थी।

झारखंड सरकार इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी एक्ट में संशोधन करने का भी प्रस्ताव लाएगी। इसके तहत कानूनों को उद्योग के हितों में थोड़ा नरम बनाया जाएगा। इस संदर्भ में उद्योग विभाग की ओर से प्रस्ताव दिया गया था। वाणिज्य कर विभाग ने इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी कानून में संशोधन का भी ड्राफ्ट तैयार किया है।इसमें भी कई नए आयाम जुड़ जाएंगे जो 1948 के इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में शामिल नहीं थे।

 

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