झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि रामनवमी के दिन बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए, जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने 3 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.
सरहुल के दिन बिजली कटौती पर नाराजगी
सरहुल के दिन राजधानी रांची में 5 से 10 घंटे तक की बिजली कटौती की गई थी, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हुई. इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं. कोर्ट ने JBVNL को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति एक आवश्यक सेवा है और बिना किसी उचित कारण के इसे बाधित करना सही नहीं है.
रामनवमी और अन्य त्योहारों पर बिजली कटौती न करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी और 6 जुलाई 2025 को मुहर्रम के दिन बिना किसी विशेष कारण के बिजली कटौती नहीं की जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर मौसम खराब न हो या कोई आपातकालीन स्थिति न हो, तो बिजली आपूर्ति बनाए रखना अनिवार्य है.
बिजली कटौती से आम जनता को होती है परेशानी
कोर्ट ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए कहा कि बिजली कटौती से आम नागरिक, खासकर बुजुर्ग, बीमार, छोटे बच्चे, परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र और गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक परेशानी होती है. व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है और अस्पतालों में मरीजों का इलाज प्रभावित होता है. कोर्ट ने कहा कि बिजली एक आवश्यक सेवा है, जिसे सुचारू रूप से चलाना सरकार की जिम्मेदारी है.
एडवोकेट जनरल की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया
एडवोकेट जनरल ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि सरहुल के दिन बिजली कटौती इसलिए की गई थी क्योंकि बड़े-बड़े झंडे लेकर शोभायात्रा निकाली जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है. उन्होंने 2000 में हुए एक हादसे का जिक्र किया, जिसमें 29 लोगों की मौत हो गई थी. इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि दुर्घटनाओं से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पूरी बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जाए.
झंडे की ऊंचाई निर्धारित करने का निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शोभायात्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले झंडों की ऊंचाई तय की जाए ताकि वे बिजली के तारों से न टकराएं. कोर्ट ने कहा कि सरकार को समय रहते आयोजकों को सूचित करना चाहिए कि झंडे एक निश्चित ऊंचाई से अधिक न हों. कानूनी एजेंसियों के माध्यम से इस नियम का पालन सुनिश्चित किया जाए.
अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2025 को
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 9 अप्रैल 2025 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 अप्रैल की तारीख तय की है. कोर्ट ने JBVNL को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि रामनवमी के दिन बिना किसी अत्यंत आवश्यक कारण के बिजली की कटौती न की जाए.