कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी..

रांची : नक्सली से बातचीत और चुनाव में मदद लेने के आरोप के मामले में रांची सिविल कोर्ट के विशेष न्यायालय के न्यायाधीश दिनेश कुमार ने बुधवार को फैसला सुनाते जमशेदपुर के पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इसकी सुनवाई एमपी-एमएल कोर्ट में हुई। अदालत ने फैसला आनलाइन सुनाया। इसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, विमल कुमार, बबीता जैन और विक्रम सिंह शामिल हुए। 24 अगस्त को डॉ अजय कुमार उन पर लगे आरोप पर अदालत में उपस्थित होकर धारा 313 दंड प्रक्रिया के तहत बयान दर्ज कराते हुए खुद को बेगुनाह बताया था।

इसकी शुरुआत तब हुई जब जमशेदपुर में भाजपा नेता दिनेशानंद गोस्वामी ने इसे लेकर साकची थाने में मामला दर्ज कराया था। जिसके बाद जिला पुलिस से मामला हस्तांतरण होकर सीआइडी डिपार्टमेंट को चला गया था। सीआइडी ने इस मुकदमे को साक्ष्य विहीन करके बंद कर दिया था और न्यायालय में फाइन रिपोर्ट के साथ भेज दिया गया था।

वही, मंगलवार को पूर्व सांसद ने विशेष अदालत में मामले में अपना पक्ष दर्ज कराया था। जानकरी हो कि जमशेदपुर सीजीएम ने सीआईडी के रिपोर्ट को अवलोकन कर 29 अप्रैल 2014 को डॉ अजय कुमार एवं प्रभात भुईयां के विरुद्ध संज्ञान धारा 171 F,120B, 506 IPC और 123/136(2)(b) आफ रिप्रजेंटेशन आफ पीपुल एक्ट 1951 अंतर्गत लिया गया था। न्यायालय से समन मिलने के बाद डॉ अजय कुमार जमशेदपुर न्यायालय में उपस्थित हुए। जिसके बाद उनके विरुद्ध आरोप गठन किया गया।

इसके बाद इस मामले में एमपी-एमएल कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां बचाव पक्ष की ओर से आरोप को प्रमाणित करने वाले साक्ष्‍य मौजूद नहीं होने का हवाला दिया गया। मामले में जमशेदपुर के पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार की एक आडियो सीडी जारी की गई थी। चुनाव में मुख्‍य विपक्षी दल भाजपा के एक नेता की ओर से इस सीडी को सार्वजनिक किया गया। इसमें आरोप लगाया गया था कि लोकसभा के चुनाव में जीत के लिए डॉ अजय कुमार ने प्रमंडल में सक्रिय भाकपा माले के एक शीर्ष नेता से बातचीत की। चुनाव में सहयोग मांगा। सीडी जारी होने के बाद यह मामला काफी चर्चित भी हुआ था।

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