नई दिल्ली लोकसभा: नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए सदन में प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने वक्फ कानून में कई बार संशोधन कर इसे अन्य कानूनों से ऊपर कर दिया, जिससे इसमें बदलाव की जरूरत पड़ी। इस विधेयक के तहत झारखंड और अन्य राज्यों के आदिवासियों को भी फायदा होने की संभावना जताई जा रही है।
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शेड्यूल 5 और 6 की जमीनों पर नहीं होगा वक्फ बोर्ड का दावा
अपने भाषण में किरेन रिजीजू ने कहा कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान किया गया है कि ‘शेड्यूल 5’ और ‘शेड्यूल 6’ की जमीनों पर वक्फ बोर्ड कभी दावा नहीं कर सकेगा। झारखंड की बड़ी मात्रा में भूमि शेड्यूल 5 के अंतर्गत आती है। ऐसे में इस विधेयक के पारित होने के बाद झारखंड के आदिवासियों की जमीन पर वक्फ बोर्ड का कोई भी दावा अमान्य होगा।
विपक्ष पर गुमराह करने के आरोप
रिजीजू ने लोकसभा में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने जनता को गुमराह करने की कोशिश की और ऐसे मुद्दे उठाए जो इस विधेयक का हिस्सा ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने संसद भवन समेत कई सरकारी संपत्तियों को गैर-अधिसूचित कर दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था।
जेपीसी की सिफारिशों के आधार पर हुए संशोधन
मंत्री ने बताया कि पिछले साल यह विधेयक पेश किए जाने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने उसकी सिफारिशों के आधार पर कुछ संशोधन किए, जिन्हें अब कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।
वक्फ बोर्ड के पास 1.2 लाख करोड़ की संपत्ति
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में वक्फ बोर्ड के पास कुल 8.72 लाख संपत्तियां हैं, जो 9.4 लाख एकड़ भूमि में फैली हुई हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 3,56,051 वक्फ एस्टेट्स पंजीकृत हैं।
सरकार का पक्ष और भविष्य की रणनीति
सरकार का कहना है कि इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य वक्फ कानून को संतुलित और न्यायसंगत बनाना है। साथ ही, इससे आदिवासी और अन्य समुदायों के भूमि अधिकारों को सुरक्षित किया जाएगा।