नामकुम थाना: दारोगा चंद्रदीप प्रसाद 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, एसीबी ने की कार्रवाई……

रांची में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को नामकुम थाना के दारोगा चंद्रदीप प्रसाद को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब दारोगा एक केस को “मैनेज” करने के नाम पर फरियादी से घूस ले रहा था. इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर दिखा दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब सख्ती से निपटा जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के निवासी आशीष यादव ने एसीबी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी. शिकायत के मुताबिक, आशीष की सगाई एक लड़की से हुई थी, लेकिन कुछ कारणों से वह सगाई टूट गई. इसके बाद लड़की के परिजनों ने आशीष यादव के खिलाफ नामकुम थाना में एक प्राथमिकी दर्ज करवाई, जिसका कांड संख्या 262/24 है. इस केस की जांच की जिम्मेदारी नामकुम थाने के दारोगा चंद्रदीप प्रसाद को दी गई थी. शिकायतकर्ता आशीष यादव को अदालत से जमानत भी मिल गई थी, लेकिन इसके बावजूद दारोगा उस पर दबाव बना रहा था. आरोप है कि दारोगा चंद्रदीप प्रसाद केस को मैनेज करने के नाम पर आशीष से एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था.

एसीबी ने की त्वरित कार्रवाई

आशीष यादव ने जब इस रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी से की, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी की रांची यूनिट ने तुरंत मामले की सत्यता की जांच शुरू की. जांच में यह स्पष्ट हो गया कि दारोगा वाकई रिश्वत की मांग कर रहा है. इसके बाद एसीबी ने एक विशेष योजना बनाकर शुक्रवार को नामकुम थाना परिसर में ही दारोगा को रंगे हाथ 30 हजार रुपये लेते हुए पकड़ लिया.

थाना परिसर में ही हुई गिरफ्तारी

गौर करने वाली बात यह है कि गिरफ्तारी थाने के अंदर ही की गई, जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार किस हद तक पहुंच चुका है. गिरफ्तारी के वक्त एसीबी की टीम ने पूरे मामले की वीडियोग्राफी भी की, जिससे सबूत पुख्ता हो सके. गिरफ्तारी के बाद दारोगा को तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है.

भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की कोशिश

इस मामले से यह स्पष्ट है कि राज्य में एसीबी भ्रष्टाचार को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है. एसीबी मुख्यालय ने यह भी बताया कि आरोपी दारोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस कार्रवाई से आम जनता के बीच यह संदेश गया है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत एसीबी में की जा सकती है और दोषी को सजा दिलाई जा सकती है.

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