व्यवस्था की अनदेखी की वजह से बेजुबान ऊटों का रख-रखाव बना बड़ी चुनौती..

बांग्लादेश भेजे जा रहे ऊंटों की तस्करी का भंडाफोड़ करनेवाले वन विभाग के रेंजर अनिल कुमार सिंह के सामने ऊटों का चारा देना बड़ी समस्या बन गया है | अब तक एक लाख रुपये उन्होंने ऊंटों के चारे व दवा में अपने पास से खर्च किए हैं। पहली बार तस्करी में पकड़े गए 14 में से चार और दूसरी बार पकड़े गए 15 में से एक की मौत हो चुकी है। अन्य 24 अभी भी बीमार हैं। रेंजर ने बताया कि सरकारी स्तर पर इन ऊंटों के भोजन की व्यवस्था नहीं है। इसलिए उन्हें अपने पास से व्यवस्था करना पड़ रहा है | जिससे बेजुबान ऊटों को दो वक़्त का चारा मिल सके |

आपको बता दें कि हर जिले में जिला पशु क्रूरता निवारण समिति गठित होता है। जिसके नियमानुसार , जिसे भी पशुओं की देखरेख की जिम्मेदारी दी जाती है, उसे पशुओं को खिलाने के लिए भत्ता दिया जाता है। 2015 के बाद से पाकुड़ में समिति की कोई बैठक नहीं हुई, न प्रावधान के तहत किसी कार्यशाला का आयोजन हुआ।

आगे रेंजर अनिल सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सक की सलाह पर ऊटों को गुड़ और पानी का घोल भी दे रहे हैं, ताकि पानी की कमी से बचा जा सकें। अभी तक उन्होंने दवा में 70 हजार व चारा और अन्य ज़रूरतों में 30 हजार रुपये खर्च किए हैं।रेंजर अनिल सिंह कहते हैं की इन बेजुबानों के लिए हमारा जो फर्ज है वो मै निभाउंगा | ऊटों को जब तक राजस्थान के सिरोही पुनर्वास केंद्र भेज नहीं देते, तब तक हर जिम्मेदारी निभाउंगा। पशु चिकित्सक द्वारा सभी ऊंटों के स्वस्थ होने का प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद ही उनको सिरोही भेजने की प्रक्रिया शुरू किया जायेगा |

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