रांची: झारखंड में सिरम टोली फ्लाईओवर रैंप और सरना स्थल विवाद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा डोरंडा-सिरम टोली फ्लाईओवर रैंप के विरोध में दर्ज की गई प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं करने के आदेश को ‘नौटंकी’ करार दिया।
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मरांडी का आरोप: पहले FIR, फिर सहानुभूति
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा, “बढ़िया नौटंकी है। पहले तो सरहुल पर्व मनाने वालों को डराने के लिए उन पर एफआईआर करो, फिर सहानुभूति बटोरने के लिए इस एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देकर विज्ञप्ति जारी कर दो।” उन्होंने आगे कहा कि अगर मुख्यमंत्री को सच में सरहुल पर्व की भावना का सम्मान करना है, तो सबसे पहले उन पुलिसकर्मियों को निलंबित करें, जिन्होंने ये एफआईआर दर्ज की।
झामुमो का पलटवार
बाबूलाल मरांडी के इस बयान पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “जब भाजपा सरकार में पत्थरगड़ी के मामले में 20 हजार आदिवासियों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे, तब बाबूलाल मरांडी चुप थे। लेकिन जब हेमंत सोरेन की सरकार आई, तो इन सभी मुकदमों को वापस लिया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके नेता हेमंत सोरेन का हृदय विशाल है, जो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर भी दर्ज मामले वापस लेने का साहस रखते हैं।
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने भी भाजपा और बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा, “अब बाबूलाल मरांडी का काम सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करना रह गया है। उनका संगठन झारखंड में लगभग समाप्त हो चुका है। भाजपा के पास अब राज्य में कोई ठोस रणनीति नहीं बची है, इसलिए वे सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार धार्मिक मुद्दों पर कभी भी खिलवाड़ नहीं करती, जबकि भाजपा नेता धार्मिक उन्माद फैलाने का काम करते हैं।
क्या है पूरा विवाद?
डोरंडा-सिरम टोली फ्लाईओवर रैंप को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है। आरोप है कि इस रैंप के निर्माण से सरना स्थल प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे पर विरोध करने के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव सहित 20 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डीजीपी को आदेश देकर इन मामलों में कोई कार्रवाई न करने को कहा, जिससे विवाद और गहरा गया।
राजनीतिक उठापटक जारी
झारखंड की राजनीति में यह मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। जहां भाजपा इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बता रही है, वहीं झामुमो और कांग्रेस इसे भाजपा की हताशा का परिणाम मान रही हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, जिससे झारखंड की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।