पूर्वी सिंहभूम: झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के गृह जिला पूर्वी सिंहभूम में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी और शिक्षा अधीक्षक ने 78 प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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स्कूलों को कल तक जवाब देने का निर्देश
जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी नोटिस में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात कही गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षा के उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्कूल परिसर में किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की बिक्री कर रहे हैं।
इसके अलावा, स्कूलों द्वारा छात्रों और अभिभावकों को एक निश्चित दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने की भी शिकायतें मिली हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडेय ने स्कूल प्रबंधकों को 3 अप्रैल तक अपना जवाब सौंपने का निर्देश दिया है। यदि स्कूलों द्वारा गलत जानकारी दी जाती है, तो उनकी भौतिक जांच की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिक आय के बावजूद बढ़ रही फीस
जिला शिक्षा विभाग ने झारखंड निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के नियम-12 (1) (ख) का उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया है कि स्कूल को किसी भी व्यक्ति या समूह के लाभ के लिए संचालित नहीं किया जा सकता। लेकिन ऑडिट रिपोर्ट की जांच में पाया गया है कि कई स्कूलों की आय उनके खर्च से अधिक होने के बावजूद वे हर साल फीस में वृद्धि कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रबंधकों को पिछले तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी सौंपने का निर्देश दिया है।
तीन साल का रिकॉर्ड मांगा गया
इसके अलावा, शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधकों से यह भी पूछा है कि क्या उन्होंने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के तहत फीस वृद्धि से संबंधित नियमों का पालन किया है। नियमों के अनुसार, दो साल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाई जा सकती है, और उससे अधिक वृद्धि के लिए समिति की मंजूरी आवश्यक होती है।
शिक्षा विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार, कई स्कूलों ने इन नियमों का पालन नहीं किया है। इसलिए, तीन साल का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। साथ ही, यह भी पाया गया है कि कई स्कूलों में विद्यालय स्तरीय फीस निर्धारण समिति का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद उसे नवीनीकृत नहीं किया गया है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल प्रबंधकों द्वारा दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।