कुंभ मेले में मंगलवार रात हुई भगदड़ के बाद रांची से प्रयागराज गए श्रद्धालुओं को वापसी में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रांची से प्रयागराज यात्रा करने वाले यात्री अब वापसी में टिकटों की भारी कमी, बसों की अनउपलब्धता और महंगे होटल रेंट्स से जूझ रहे हैं।
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संगम स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंगलवार रात प्रयागराज पहुंचे थे, लेकिन भगदड़ के बाद उन्हें वापसी में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रयागराज से रांची लौटने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी कमी हो गई है। वहीं, रांची आने के लिए कई यात्री अलग-अलग रास्तों का चुनाव कर रहे हैं—कहीं यात्री प्रयागराज से बनारस, तो कहीं धनबाद के रास्ते रांची पहुंच रहे हैं। कुछ यात्री तो टैक्सी से रांची लौटने के लिए 16 हजार रुपए तक किराया चुकता कर रहे हैं।
प्रयागराज से रांची लौटने के लिए यात्री बसों और टैक्सी सेवाओं पर निर्भर हैं, लेकिन बुधवार को हुई घटना के बाद बसें भी बहुत कम संख्या में प्रयागराज जा रही हैं। झारखंड बस चालक संघ के अध्यक्ष राणा बजरंगी के अनुसार, पहले 24 बसें रांची से प्रयागराज जाती थीं, लेकिन बुधवार को यह संख्या घटकर सिर्फ 3 हो गई। गुरुवार को केवल 200 श्रद्धालु ही बसों से प्रयागराज जा पाए। वहीं, मंगलवार को गए ज्यादातर बसें वापस नहीं लौट पाई हैं, जिसके कारण बसों की उपलब्धता और भी कम हो गई है।
इसके अलावा, सड़क पर लंबा जाम लगने के कारण, रांची से प्रयागराज की 547 किलोमीटर की दूरी तय करने में 22 से 24 घंटे का समय लग रहा है। जबकि पहले यह यात्रा महज 10 घंटे में पूरी हो जाती थी। निजी वाहनों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है, क्योंकि मंगलवार के हादसे के बाद निजी वाहनों के चालक जाम के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
प्रयागराज से वापसी के लिए फ्लाइट का किराया भी बेतहाशा बढ़ गया है। रांची से वाराणसी के लिए उड़ान का किराया अब 32 हजार रुपए तक पहुंच गया है। फ्लाइट की 90% टिकटें 26 फरवरी तक बुक हो चुकी हैं, जिसके कारण किराया लगातार बढ़ रहा है।
कुम्भ मेला प्रशासन की ओर से शहर को नो ट्रैफिक जोन घोषित किए जाने के कारण श्रद्धालुओं को संगम तक पैदल ही जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। वहीं, होटल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। एक होटल का कमरा, जिसकी पहले कीमत 1000 रुपये थी, अब 4000 रुपये तक हो गया है। कुल मिलाकर, कुंभ मेला में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को लौटने में न केवल लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, बल्कि बढ़ते किराए और कम होती यात्री सुविधाओं से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।