देवघर के पेड़ा को मिलेगी विशेष पहचान, जीआई टैग दिलाने की कोशिश में जिला प्रशासन..

भोलेबाबा की नगरी देवघर की देश-विदेश में महत्वता तो पहले से ही थी, वहीं अब यहां मिलने वाला पेड़ा को भी वैश्विक पहचान देने की पहल की जा रही है| देवघर में मिठाई व प्रसाद के तौर पर मिलने वाले पेड़े को जल्द ही जीआई टैग (Geographical Indicator)मिल सकता है।जिला प्रशासन ने भौगोलिक संकेतक यानी कि जीआई (GI Tags) दिलवाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है।

देवघर के डिप्टी कमिश्नर कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि बाबाधाम के पेड़ा की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए जिला प्रशासन ने जीआई टैग के लिए आवेदन करने का फैसला किया है।उन्होंने बताया कि देश भर में बाबाधाम का पेड़ा प्रसाद के तौर पर मशहूर है और साल भर यहां आने वाले करोड़ों भक्त इसे खरीद कर अपने सगे-संबंधियों के लिए ले जाते हैं। श्री सिंह ने बताया कि हालांकि पेड़ा के लिए जीआई टैग का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव काफी पुराना है, लेकिन इस बार जिला प्रशासन प्रस्ताव को जल्द से जल्द जमीन पर लाने के लिए कदम उठा रही है।

जानकारी के मुताबिक बाबाधाम पेड़ा के जीआई टैग के लिए जिला प्रशासन जल्द ही चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में अप्लाई करेगा। वैसे बाबा बैद्यनाथ मंदिर में खोए से बनी इस मिठाई को प्रसाद के रूप में चढ़ाया नहीं जाता है, लेकिन बढ़ते समय के साथ ये मिठाई एक तरह की परंपरा बन गई है| यहीं कारण है कि मंदिर में आने वाले अधिकतर श्रद्धालु पेड़ा खरीदकर ले जाते हैं।

जीआई टैग के लिए पहल करते हुए जिला प्रशासन ने बाबाधाम पेड़ा ट्रेडर्स एसोसिएशन (BPTA) के साथ बैठक कर जिले के नियमित पेड़ा व्यापारियों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।एक अन्य बैठक में देवघर के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शैलेन्द्र कुमार लाल ने जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारियों के साथ प्रस्ताव पर चर्चा की| उन्होंने अधिकारियों को पेड़ा के जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जीआई टैगिंग से ना सिर्फ पेड़ा व्यापारियों की आय में वृद्धि होगी बल्कि इस उत्पाद को वैश्विक पहचान भी मिलेगी। डीडीसी ने कहा कि बरसों से पेड़ा व्यापार में शामिल व्यापारियों की वित्तीय स्थिति इससे कई गुना बढ़ जाएगी।

वहीं एक अधिकारी ने बताया कि जीआई टैग एक विशिष्ट चिन्ह है जिसका उपयोग उत्पाद पर किया जाता है। इसका उपयोग, अद्वितीय लक्षण, वर्णन और ग्लोबल उत्पादन के आधार पर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसी भी उत्पाद को जीआई टैगिंग मिलते ही उसके भौगोलिक क्षेत्र से बाहर नकल करने पर जुर्माना भी लग सकता है।

आपको बता दें कि, किसी क्षेत्र विशेष के उत्पादों को जीओग्रैफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) से विशेष पहचान मिलती है। भारत में करीब 600 से ज्यादा उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है जिसमें चंदेरी की साड़ी, कांजीवरम की साड़ी, दार्जिलिंग चाय महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी, जयपुर ब्लू पोटरी, बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, मध्य प्रदेश के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गा और मलिहाबादी आम व अन्य शामिल है|

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