झारखंड में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. यह छापेमारी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े एक बड़े घोटाले के मामले में की गई है. ईडी ने शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में एक साथ दबिश दी. इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र बना पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का पूर्व आप्त सचिव ओम प्रकाश सिंह गुड्डू, जिनके रांची और जमशेदपुर स्थित ठिकानों पर ईडी की टीमों ने एक साथ छापा मारा. जानकारी के अनुसार, राजधानी रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित अरविंद मार्ग के रश्मि एनक्लेव और रामेश्वरम लेन के श्यामा एनक्लेव के तीसरे माले पर रहने वाले सुजीत यादव के घर पर भी छापेमारी की गई. इन जगहों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईडी की टीम ने रेड की और कई घंटों तक दस्तावेजों की जांच की. इसी के साथ जमशेदपुर के एनएच-33 मार्ग स्थित नीलगिरी कॉलोनी, जो बिग बाजार के पीछे स्थित है, वहां भी ईडी की टीम पहुंची. यह इलाका ओम प्रकाश सिंह गुड्डू से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. वहां भी गहन पूछताछ और दस्तावेज खंगालने की कार्रवाई की गई. हालांकि, ईडी की ओर से अभी तक जमशेदपुर में की गई छापेमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वहां भी एक साथ कई स्थानों पर रेड पड़ी है. छापेमारी के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. ईडी की टीमों ने परिजनों से पूछताछ की और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य जरूरी सबूतों की तलाशी ली.
ईडी की जांच की पृष्ठभूमि
ईडी की इस कार्रवाई की नींव उस वक्त रखी गई जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में आयुष्मान भारत योजना के तहत झारखंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य के कुछ अस्पतालों ने फर्जी मरीजों के नाम पर इलाज दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान लिया. यह भी सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी बिल बनाए गए जो पहले ही मृत घोषित हो चुके थे. इस रिपोर्ट के आधार पर ईडी ने आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मामले में ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) दर्ज कर जांच शुरू की. इसके बाद झारखंड स्टेट हेल्थ सोसाइटी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेज भी मंगवाए गए. जांच के दौरान यह संदेह मजबूत हुआ कि इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों, निजी अस्पतालों, इंश्योरेंस कंपनियों और दवा कंपनियों की मिलीभगत हो सकती है. इसी कारण ईडी ने करीब 200 से अधिक अस्पतालों, बीमा कंपनियों और फार्मा कंपनियों को जांच के दायरे में लिया है.
राजनीतिक हलकों में हड़कंप
ईडी की इस कार्रवाई ने झारखंड की सियासत में हलचल मचा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि जिन लोगों के ठिकानों पर छापा पड़ा है, वे सीधे तौर पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता से जुड़े रहे हैं. ओम प्रकाश सिंह गुड्डू, जो पहले बन्ना गुप्ता के आप्त सचिव रह चुके हैं, अब ईडी की जांच के केंद्र में हैं. हालांकि, बन्ना गुप्ता की ओर से अभी तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन यह साफ है कि आयुष्मान भारत योजना में हुए इस घोटाले की जांच आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जिससे और भी कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं.
आगे की कार्रवाई
ईडी की इस छापेमारी का मकसद सिर्फ संदिग्ध ठिकानों की तलाशी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करना है जिसमें सरकारी धन का दुरुपयोग कर लाभ कमाया गया. जांच एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर और भी लोगों से पूछताछ की जा सकती है. झारखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा यह घोटाला राज्य की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है. यदि ईडी की जांच में और पुख्ता सबूत सामने आते हैं, तो कई और अधिकारियों और राजनेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. फिलहाल झारखंड के लोग इस छापेमारी की आगे की कड़ियों पर नजर टिकाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों को जल्द ही सजा मिलेगी और राज्य में स्वास्थ्य योजनाओं की साख को बहाल किया जा सकेगा.