बीएयू विदेशी फल अवोकाडो पर करेगी शोध..

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में विदेश से आने वाला फल अवोकाडो पर शोध किया जाएगा। इसके अलावा, किसानो के आमदनी में वृद्धि हो, इसके लिए राज्य में व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। सोमवार को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ओंकारनाथ सिंह और रांची विवि के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने विवि परिसर स्थित टेक्नोलॉजी पार्क में 15 एवोकाडो के पौधे लगाये।

बीएयू के कुलपति डॉ ओंकारनाथ सिंह ने बताया कि लेटराइट मिट्टी में इसकी खेती के लिए ज़्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही, झारखण्ड का मौसम अनुकूल रहने की वजह से इसकी संभावना के आकलन के लिए बीएयू ने शोध की पहल की। इसकी खेती अच्छे से हो , इससे प्रदेश में किसानों को ज़्यादा आय भी होगी। इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर रोज़गार के साथ पोषण सुरक्षा एवं निर्यान की संभावना को ताकत भी मिलेगी।

अवोकाडो फाइबर, ओमेगा-तीन, फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, इ और पोटैशियम से भरपूर होते है। इसके विटामिन बी की प्रचुरता तनाव से लड़ने में मदद करता है। यह फल खास तौर पर दक्षिण मध्य मैक्सिको में पाया जाता है। तकरीबन 34% उत्पादन मैक्सिको द्वारा पुरे विश्व में किया जाता है। भारत में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में भी की जाती है। भारत में इसकी कीमत 400-1000 रुपये प्रति किलो है। इसे रूचिरा, मक्खनफल, एवोकाडो पियर या एलीगेटर पियर के नाम से भी जाना जाता है.

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