रांची: झारखंड में बढ़ती गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराने की आशंका है। राज्य में कुल दो लाख 18 हजार 114 हैंडपंप लगे हुए हैं, जिनमें से 52 हजार 274 खराब पड़े हैं। इनमें से अधिकांश में मामूली तकनीकी खराबी है, लेकिन मिस्त्रियों की कमी के कारण इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है।
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गर्मी में पेयजल संकट गहराने की संभावना
मौसम विभाग ने अप्रैल से जून तक राज्य में असामान्य रूप से अधिक गर्मी पड़ने की चेतावनी दी है। ऐसे में अगर समय रहते हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की गई, तो लाखों लोगों को पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी के मौसम में राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में कुएं सूख जाते हैं, जिससे जलापूर्ति का एकमात्र सहारा हैंडपंप ही रह जाते हैं।
राज्यभर में हजारों हैंडपंप खराब
पेयजल स्वच्छता विभाग के अनुसार, राज्य में वर्तमान में एक लाख 65 हजार 732 हैंडपंप काम कर रहे हैं। लेकिन 52 हजार से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द ठीक किए जाने की जरूरत है।
बोकारो में सबसे अधिक खराब हैंडपंप
झारखंड के 10 जिलों में तीन हजार से लेकर 10 हजार तक हैंडपंप खराब पड़े हैं। इनमें बोकारो सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां 6,840 हैंडपंप काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा गढ़वा में 5,245, धनबाद में 3,171, सिमडेगा, साहिबगंज और दुमका जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हैं। दूसरी ओर, लातेहार जिले में सबसे कम 696 हैंडपंप खराब हैं।
जल्द सुधार कार्य की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द इन हैंडपंपों की मरम्मत का कार्य तेज करना होगा। इसके लिए अधिक मिस्त्रियों की नियुक्ति और आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाने चाहिए। यदि समय रहते यह काम नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में राज्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।