झारखंड में जल्द लागू होगा पेसा कानून, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को दिया आश्वासन…..

झारखंड में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 यानी पेसा कानून को जल्द लागू किया जाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने का आश्वासन दिया. इस दौरान राज्यपाल ने हजारीबाग हिंसा का भी मुद्दा उठाया और प्रशासन को सख्त निर्देश देने की बात कही.

राजभवन में हुई बैठक, पेसा कानून पर चर्चा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को राजभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. इस बैठक में राज्य के कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें पेसा कानून को जल्द लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया. राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं क्योंकि पेसा कानून अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को जमीन, संसाधनों और स्थानीय विकास से जुड़े फैसले लेने का अधिकार मिलना चाहिए, जो इस कानून के प्रभावी रूप से लागू होने के बाद संभव होगा. राज्यपाल ने पेसा नियमावली को जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए और कहा कि इसके लागू होने से आदिवासी समुदायों का सशक्तिकरण होगा और उन्हें स्वशासन का अधिकार मिलेगा. उन्होंने बताया कि कई संगठनों ने पेसा कानून को लागू करने के लिए ज्ञापन सौंपा है, जिसके आधार पर सरकार को तुरंत निर्णय लेना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार पेसा कानून को शीघ्र लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली का ड्राफ्ट पहले ही जारी किया जा चुका है और इस पर जनता की आपत्तियां व सुझाव मांगे गए थे. इन सुझावों की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक संशोधन करने के बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा. सीएम ने कहा कि झारखंड में आदिवासी हितों की रक्षा के लिए उनकी सरकार हरसंभव कदम उठा रही है और जल्द ही पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.

हजारीबाग हिंसा पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान राज्यपाल ने हजारीबाग जिले के इचाक में महाशिवरात्रि के दिन हुई हिंसा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं. महाशिवरात्रि के दिन लाउडस्पीकर और झंडा लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हो गया था, जिसके बाद पथराव की घटना हुई और कई लोग घायल हो गए. राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार को इस तरह की घटनाओं पर कठोर नियंत्रण रखना चाहिए और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश देने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों. उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी सुझाव दिया.

राज्य में प्रशासनिक नियुक्तियों पर भी चर्चा

राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष की नियुक्ति सहित कई प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा हुई. राज्यपाल ने कहा कि सरकार को प्रशासनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता रखनी चाहिए ताकि राज्य के युवाओं को निष्पक्ष अवसर मिल सकें.

पेसा कानून क्यों जरूरी है?

पेसा कानून 1996 में संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्वशासन का अधिकार देना है. इस कानून के तहत ग्राम सभा को भूमि, जल, वन और खनिज संसाधनों पर निर्णय लेने की शक्ति मिलती है. झारखंड में अब तक यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, जिससे आदिवासी समुदायों को उनके हक से वंचित होना पड़ा है. अगर पेसा कानून पूरी तरह लागू होता है, तो झारखंड के आदिवासियों को अपने क्षेत्र के संसाधनों पर स्वायत्त अधिकार मिलेंगे और उनकी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को संरक्षित किया जा सकेगा.

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