रांची: रांची में जल संकट की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने शहर के 17 इलाकों को डेंजर जोन के रूप में चिह्नित किया है। इन क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे पानी की उपलब्धता पर संकट मंडराने लगा है। इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इन इलाकों में जार वाटर प्लांट के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। निगम द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, जो प्लांट पहले से संचालित हो रहे हैं, उन्हें अप्रैल के पहले सप्ताह से बंद किया जाएगा।
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डेंजर जोन में शामिल इलाके
नगर निगम द्वारा जिन 17 क्षेत्रों को डेंजर जोन में रखा गया है, वे हैं- हरमू कॉलोनी, विद्यानगर, किशोरगंज, न्यू मधुकम, खादगढ़ा, रातू रोड, कांके रोड, टैगोर हिल, बरियातू रोड, कोकर, बूटी मोड़, हिंदपीढ़ी, डोरंडा, धुर्वा, हटिया और तुपुदाना। पहले इन क्षेत्रों में 170 से 250 फीट की गहराई में पानी उपलब्ध हो जाता था, लेकिन अब जलस्तर तेजी से गिरकर 700-800 फीट तक पहुंच गया है।
जल संकट के समाधान के लिए नगर निगम का कदम
नगर निगम ने जल संकट से निपटने के लिए सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के आधार पर पूरे शहर को चार जोन में विभाजित किया है:
- सुरक्षित जोन: यहां जार वाटर प्लांट को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
- अर्द्ध गंभीर जोन: इस क्षेत्र में 31 मार्च 2026 तक प्लांट चलाने की अनुमति होगी।
- क्रिटिकल जोन: इस क्षेत्र में जार वाटर प्लांट संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- अत्यधिक दोहन क्षेत्र: यहां जलस्तर अत्यधिक गिर चुका है, इसलिए किसी भी प्लांट के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
टैंकरों से होगी जल आपूर्ति
गर्मी के मौसम में इन प्रभावित क्षेत्रों में जल संकट और गहरा जाता है। बोरिंग सूख जाने के कारण लोग पूरी तरह नगर निगम के टैंकरों पर निर्भर हो जाते हैं। नगर निगम हर साल 400 से अधिक मोहल्लों में टैंकरों से पानी वितरित करता है। गर्मी के दिनों में टैंकरों से जल आपूर्ति के दौरान कई जगहों पर अव्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
जल संरक्षण की दिशा में उठाए जा रहे कदम
रांची नगर निगम जल संकट को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है और लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है। साथ ही, निगम नए जल स्रोतों को विकसित करने और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया को तेज करने पर भी काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जल संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।